बांका का 'कैबिनेट दावा': अनुभव और समीकरणों की जंग

बांका का 'कैबिनेट दावा': अनुभव और समीकरणों की जंग

Banka Cabinet Claim A Battle of Experience

Banka's 'Cabinet Claim': A Battle of Experience

बांका। बिहार में सात मई को मंत्रिमंडल का गठन होगा। इसको लेकर बांका जिला के सभी विधायक पटना शिफ्ट हो गये हैं। खास बात यह है कि इस बार मंत्रिमंडल गठन के शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने की भी सूचना है।

खासकर मुख्यमंत्री देने वाले बांका जिला में इसको लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जिला के विभिन्न हिस्सों में अपने-अपने जनप्रतिनिधियों को मंत्री बनाए जाने की मांग तेज होने लगी है। नेता से लेकर कार्यकर्ता लगातार अपने नेताओं की मंत्रिमंडल में दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।

दरअसल, 1980 के दशक में बांका से कांग्रेस के विधायक रहे चन्द्रशेखर सिंह बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। इसका लाभ बांका को मिला था। इसके अलावा कई विधायकों को मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इसमें जननायक कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्री काल में अमरपुर के विधायक रहे गुणेश्वर सिंह शिक्षा मंत्री बने थे।

इसके अलावा भाजपा के जर्नादन यादव दो-दो विभागों के, प्रो सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, बांका से भाजपा विधायक रामनारायण मंडल, जदयू से जावेद इकबाल अंसारी के अलावा अमरपुर से जदयू विधायक जयंत राज कुशवाहा मंत्री बने हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में जयंत ने ग्रामीण कार्य विभाग, लघु सिंचाई एवं भवन निर्माण विभाग की जिम्मेदारी निभाई है। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में यहां से किसे मंत्रीमंडल में जगह मिलती है। इस पर सभी की नजर है।

बांका की राजनीति में लंबे अनुभव वाले कई विधायक

दरअसल, बांका जिला के पांच विधानसभा सीटों पर नजर डालें तो यहां तीन सीटों पर जदयू और दो सीटों पर भाजपा का कब्जा है। ऐसे में गठबंधन की राजनीति के तहत दोनों दलों के कार्यकर्ता अपने-अपने विधायकों को मंत्री बनाए जाने की मांग कर रहे हैं।

मंत्रिमंडल में जगह से मिलने से होगा समुचित विकास

भाजपा जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार मिश्रा उर्फ विक्की मिश्रा ने कहा कि जिला को इस बार मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इससे जिला का समुचित विकास होगा। भाजपा नेता अनुपम गर्ग ने कहा कि राजनीतिक दृष्टि कोण से बांका का इतिहास मंत्री पद के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है।

80 के दशक में यहां से विधायक रहे चंद्रशेखर सिंह ने मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया था। इसके बाद भी समय-समय पर नेताओं को मंत्री बनने का अवसर मिला है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद राउत ने कहा कि पांच विधायकों में किसी को भी मंत्री सरकार को बनाना चाहिए।

रामनारायण मंडल का लंबा राजनीतिक अनुभव

सियासी चर्चा के अनुसार, रामनारायण मंडल का भी लंबा राजनीतिक अनुभव है। जयंत राज को तीन-तीन विभागों को चलाने का अनुभव है। इधर, बेलहर से जदयू विधायक मनोज यादव दो बार एमएलसी व दूसरी बार विधायक बने हैं।

धोरैया से जदयू विधायक मनीष कुमार चौथी बार चुनाव जीते हैं। इस कारण रजौन के जदयू प्रखंड अध्यक्ष अंजनी चौधरी विधायक मनीष को मंत्री बनाने की मांग प्रदेश नेतृत्व से कर रहे हैं।

कटोरिया (एसटी) से पहली बार विधायक बने भाजपा के पूरणलाल टुडू को भी उनके समर्थक मंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिलेगी

जिला परिषद अध्यक्ष राजेन्द्र यादव ने कहा कि अगर जिला से किसी विधायक को मंत्री बनाया जाता है, तो इससे क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिलेगी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी।

भाजपा के मुकेश सिन्हा ने कहा कि विधायकों के मंत्री बनने से जिला की राजनीतिक पहचान भी मजबूत होगी। अब सबकी निगाहें सात मई को होने वाले मंत्रिमंडल गठन पर टिकी हैं।

यह देखना यह होगा कि सम्राट की सरकार क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधते हुए यहां कितनी प्राथमिकता देती है और किस विधायक को मंत्री पद का मौका मिलता है।